दिल्ली की पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है जब उसने किडनी की अवैध तस्करी के एक बड़े नेटवर्क के मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी का नाम रोहित तिवारी है, जो दिल्ली के अलावा कानपुर, लखनऊ और अन्य शहरों में भी अपनी वारदातें अंजाम दे रहा था। महीनों की निगरानी के बाद अंततः तिवारी एक छोटी सी गलती के कारण पुलिस के हाथ में आ गया।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, रोहित तिवारी इस पूरे अवैध किडनी तस्करी नेटवर्क को अकेले ही संचालित कर रहा था। वह संपर्क में आने वाले रोगियों और दाताओं के बीच संबंध स्थापित करता था और अवैध ऑपरेशन का आयोजन करता था। उसके पास विभिन्न शहरों में चिकित्सा पेशेवरों और अन्य सहायकों का एक नेटवर्क था जो उसके निर्देशों का पालन करते थे।
गिरफ्तारी में महत्वपूर्ण भूमिका रोहित की गर्लफ्रेंड के साथ की गई व्हाट्सएप कॉल रही। जांच दल ने पाया कि रोहित अपनी गर्लफ्रेंड से नियमित रूप से फोन पर बातचीत किया करता था और इन बातचीत के दौरान वह अपनी गैरकानूनी गतिविधियों के बारे में विस्तार से जानकारी देता था। तकनीकी विश्लेषण के माध्यम से सुरक्षा एजेंसियां उसके ठिकानों तक पहुंचने में कामयाब रहीं।
रोहित तिवारी के अवैध कारोबार से कई मासूम लोगों को शारीरिक नुकसान हुआ था। गरीब और असहाय लोगों को गुमराह करके उनकी किडनी निकाली जाती थी और बड़ी रकम में उन्हें बेच दिया जाता था। पीड़ितों में से कुछ को संक्रमण और अन्य जटिलताओं का सामना करना पड़ा। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, ये अवैध प्रत्यारोपण अत्यंत खतरनाक होते हैं क्योंकि इनमें उचित स्वास्थ्य जांच और अनुवर्ती देखभाल नहीं होती है।
पुलिस अब रोहित के संपूर्ण नेटवर्क को उजागर करने के लिए पूछताछ कर रही है। जांच से यह पता चल रहा है कि इस गिरोह ने पिछले तीन से चार वर्षों में कई दर्जन लोगों की किडनी निकाली होगी। विभिन्न शहरों में इससे जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग भी प्रभावित चिकित्सा संस्थानों की जांच कर रहा है जहां ये अवैध ऑपरेशन किए गए थे।